Friday, November 30, 2018

पोवार के आरोपों पर मिताली का जवाब- ये मेरे जीवन का सबसे काला दिन

टी-20 विश्व कप में बल्लेबाजी क्रम को लेकर संन्यास की धमकियों, नखरों और टीम में अव्यवस्था फैलाने के कोच रमेश पोवार के आरोपों पर जवाब देते हुए सीनियर क्रिकेटर मिताली राज ने कहा ,‘यह मेरे जीवन का सबसे काला दिन है.’ मिताली ने पहले पोवार पर आरोप लगाया था कि वह उन्हें बर्बाद करना चाहते थे, जबकि कोच ने टी-20 विश्व कप पर अपनी रिपोर्ट में टूर्नामेंट के दौरान उनके रवैये पर सवाल उठाए.

आरोपों पर भड़के पोवार, कहा- कोचों को ब्लैकमेल करना बंद करें मिताली राज

भारत को सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने हराया और उसी मैच में मिताली को बाहर किए जाने पर विवाद उठा था. मिताली ने पोवार के आरोपों पर अपने ट्विटर पेज पर लिखा,‘ मैं इन आरोपों से बहुत दुखी और आहत हूं. खेल के प्रति मेरी प्रतिबद्धता और देश के लिए 20 साल खेलने के दौरान मेरी मेहनत, पसीना सब बेकार गया.’

उन्होंने कहा ,‘आज मेरी देशभक्ति पर संदेह किया जा रहा है, मेरे हुनर पर सवाल उठाए जा रहे हैं और मुझ पर कीचड़ उछाला जा रहा है. यह मेरे जीवन का सबसे काला दिन है. ईश्वर मुझे शक्ति दे.’

मिताली और कोच के बीच के इस विवाद ने भारतीय महिला क्रिकेट को झकझोर दिया है. मिताली ने पहले पोवार को प्रशासकों की समिति की सदस्य डायना एडुलजी पर पक्षपात का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि डायना ने उनके खिलाफ अपने पद का दुरुपयोग किया, जबकि पोवार ने उन्हें अपमानित किया.

दूसरी ओर पोवार ने अपनी दस पन्ने की रिपोर्ट में विस्तार से जानकारी दी है. इनमें से पांच पन्नों में मिताली के बारे में लिखते हुए उन्होंने कहा कि उसने पारी की शुरुआत करने का मौका नहीं दिए जाने पर दौरा बीच में छोड़ने की धमकी दी थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वह टीम के लिए नहीं, बल्कि निजी रिकॉर्ड के लिए खेलती हैं.

दरअसल अरविंद सुब्रह्मण्यन ने नोटबंदी को एक बड़ा झटका करार देते हुए कहा कि नोटबंदी इकोनॉमी के लिए एक खतरनाक और तगड़ा झटका था. इससे अर्थव्यवस्था के विकास की रफ्तार तेजी से गिरने लगी. उन्होंने कहा कि इस एक कदम से चलन में 86 फीसदी मुद्रा बाहर निकाल दी गई थी. नोटबंदी का असर रियल जीडीपी पर देखने को मिला.

अरविंद ने कहा कि कि इकोनॉमी की रफ्तार वैसे पहले से ही धीमी थी. लेक‍िन नोटबंदी के बाद यह और भी तेजी से गिरने लगी. उन्होंने अपनी किताब 'ऑफ काउंसेल: द चैलेंजेस ऑफ द मोदी-जेटली इकोनॉमी' में लिखा कि नोटबंदी से पहले की 6 तिमाही में अर्थव्यवस्था की रफ्तार 8 फीसदी की दर से थी. नोटबंदी के बाद की बात करें, तो इसके बाद 7 तिमाही में इकोनॉमी की रफ्तार घटी और यह 6.8 फीसदी पर आ गई.

No comments:

Post a Comment